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पीएम नरेंद्र मोदी ने किया “उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986” में बदलाव, नाम बदलने के साथ जोड़े गए कई महत्वपूर्ण उपभोक्ता अधिकार। •

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भारत के कानूनों में लोगो के हितो के लिए कई प्रकार के क़ानून बनाए गए हैं। और इन्ही में से एक हैं। उपभोक्ता संरक्षण अधिकार 1986। उपभोक्ता संरक्षण अधिकार 1986 में लागू हुआ था। जिसके अंदर कोई भी उपभोक्ता अपने साथ विक्रेता द्वारा की गयी धोखाड़ी की शिकायत कर सकता हैं। इस क़ानून को लोगो के मसलो को सुलजाया जाता हैं। जो 1986 से चला आ रहा हैं। पर अब उपभोक्ता संरक्षण अधिकार 1986 में कुछ बदलाव किया जा चुका हैं। और यह बदलाव पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में किए गए हैं।

नया क़ानून उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019?  

पीएम नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा बनाए गए नए क़ानून उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 का ऐलान किया हैं। जिसमे उपभोक्ता क़ानून को ओर ज्यादा मजबूत बनाया गया हैं। इसके अंदर पुराने क़ानून के साथ कुछ नए क़ानून भी जोड़े गए हैं। जिनका वर्णन विस्तारपूर्वक नीचे किया जा रहा हैं।

  • नए क़ानून में उपभोक्ता किसी भी Consumer Court में मामला दर्ज़ करवा सकता हैं।
  • नए क़ानून के अंतगर्त ऑनलाइन और Teleshopping को पहली बार जोड़ा जाएगा।
  • अगर किसी खाने-पीने की चीज़ में मिलावट की जाती हैं। तो विक्रेता के खिलाफ कारवाई की जाएगी।
  • नए क़ानून में कंज़्यूमर मिडीयशन सेल का गठन होगा। जिसमे दोनों पक्ष आपसी सहमति से कंज़्यूमर मिडीयशन सेल में जा सकते हैं।
  • जनहित याचिका अब Consumer Form में फ़ाइल की जा सकेगी।
  • Consumer Form में अब 1 करोड़ से ज्यादा केस दर्ज़ करवाए जा सकते हैं।
  • स्टेट कंज़्यूमर डिसप्यूट रिडसेल में 1 करोड़ से 10 करोड़ तक के पैसो की सुनवाई की जाएगी।
  • नेशनल कंज़्यूमर डिसप्यूट रिडसेल में 10 करोड़ से उपर के केस सुलजाए जाएगे।

कब लागू होगा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019?

सरकार के प्रयास तो यह था की उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 को साल 2020 के शुरू में लागू कर दिया जाए। पर कोरोना महामारी के वजह से यह हो नहीं पाया। अब उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 सरकार द्वारा 20 जुलाई 2020 को पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा।

क्या हैं उपभोक्ता संरक्षण अधिकार 1986?

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अंतर्गत यदि कोई भी विक्रेता अपने उपभोक्ता के साथ किसी समान की खरीद-फ़रोख्त को लेकर धोखाधड़ी करता हैं। तो उपभोक्ता उस विक्रेता के खिलाफ़ उपभोक्ता संरक्षण में शिकायत दर्ज़ करवा सकता हैं। और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत विक्रेता के खिलाफ सख्त कारवाई की जाती हैं।

  • उपभोक्ता- किसी भी दुकान से जो व्यक्ति पैसे देकर कोई सामान खरीदता हैं। उसे उपभोक्ता कहा जाता हैं।
  • विक्रेता- विक्रेता एक एस व्यक्ति होता हैं जो किसी भी दुकान का संचालन करता हैं। और लोगो को पैसे के बदले सामान उपलब्ध करवाता हैं।

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