Home त्यौहार Ramadan 2020: रमज़ान कब हैं? रमज़ान क्यों मनाया जाता हैं?

Ramadan 2020: रमज़ान कब हैं? रमज़ान क्यों मनाया जाता हैं?

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Ramjan Kab Hain, Ramdan Kab Banaya Jata hai, Ramjaan/ Ramzan: भारत एक ऐसा देश हैं जहा हर त्योहार बड़ी धूम धाम व हर्षौल्लास के साथ मनाया जाता हैं। और हर धर्म, जाति तथा समुदाए के लोग अपनी संस्कृति के त्योहारो को पूरी स्वतंत्रा के साथ मानाते हैं। अप्रैल महीने की शुरुवात में मुस्लिम समुदाए के लोगो के बीच एक खुशी की लहर दोड़ जाती हैं। क्योकि अप्रैल के माह में पाक रमज़ान का आगाज होता हैं। जो मुस्लिम समुदाए के लोगो का प्रिय त्योहार होता हैं। रमज़ान के चलते मुस्लिम समुदायो के व्यक्तियों के घर पर एक अलग तरह का माहौल होता हैं। जो सभी के चेहरो पर मुस्कान बिखेर देता हैं।

रमज़ान 2020 कब हैं?

तो रमज़ान 2020 का आगाज जल्द ही हो जाएगा जिसमे मुस्लिम धर्म के सभी व्यक्ति अल्लाह की इबादत करेगे और सलामती की दुआ करेंगे। रमज़ान के महीने में हर व्यक्ति महिला, पुरुष, बच्चे, और बूढ़े रोज़े रखने की प्रक्रिया को निभाते हैं। मुस्लिम व्यक्तियों के अनुसार अगर भूखे पेट रमज़ान में अल्लाह की इबादत की जाती हैं तो वो हमारी दुआ जरूर कुबूल करते हैं। और हम पर अपनी महर बनाए रखते हैं। रमज़ान 2020 का आगाज़ 24 अप्रैल को हो जाएगा जो 23 मई तक चलेगा। इन दिनो के प्रश्चात 24 मई 2020 को मुस्लिम समुदाए के लोग ईद का आगाज़ करेंगे और पूरे जोश के साथ ईद के त्योहार को मनाएगे।

 रमज़ान क्यों मनाया जाता हैं?

रमज़ान क्यों मनाया जाता हैं? ये एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न हैं। रमज़ान की उत्पत्ति को जानने के लिए हमे इतिहास की परतो को खोलने के जरूरत हैं। इस्लामिक धर्म की मान्यताओ के अनुसार मोहम्म्द साहब (इस्लामिक पैगम्बर) ने वर्ष 610 में जब इस्लाम धर्म की पवित्र किताब कुरान शरीफ का का ज्ञान हुआ तबसे ही रमज़ान के महीने की शुरुवात हो गयी। और अल्लाह की इबादत करने के लिए रमज़ान के महीने में रोज़े रखने का प्रचल्न शुरू हुआ।

मुस्लिम लोगो के अनुसार रमज़ान के महीने में रोज़े रख के वो लोग बेसहारा और भूखे लोगो के दर्द को महसूस करते हैं। इसके लिए वो 30 दिन के रोज़े रखते हैं। जिसमे सूर्यास्त और सूर्योदय से पहले वह खाने-पीने की किसी भी चीज़ को ग्रहण नहीं करते हैं।

30 दिन के रोज़े को मुस्लिम लोग तीन हिस्सो में बाँट देते हैं। जिसे अशरा कहा जाता हैं। पहले अशरे में वो अल्लाह से दया की याचना करते हैं।, दूसरे अशरे में वो अल्लाह से अपने गुनाहों के लिए माफी मांगते हैं। तथा तीसरे अशरे में वो जहानुम की आग से खुद को बचाने की दुआ करते हैं। इसके प्रश्चात वो ईद के पर्व के साथ रमज़ान के महीने का अंत करते हैं।

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