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कुमाऊँ, गढ़वाली, और जौनसारी लोकगीतो के गायक हीरा सिंह राणा का दिल का दौरा पड़ने से निधन।

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कुमाऊँ, गढ़वाली, और जौनसारी लोकगीतो के गायक हीरा सिंह राणा का दिल का दौरा पड़ने से निधन: हीरा सिंह राणा उत्तराखंड के एक ऐसे वीर सपूत थे जिन्होने उत्तराखंड के लोकगीतो को एक नए मुकाम तक पहुचाया था। उनके द्वारा गढ़वाली, जौनसारी, और कुमाऊँ भाषा में गाये गए गीतो से बहुत उपलब्धि हासिल करी थी। पर अब वह हमे बीच में नहीं रहे। देर रात दिल्ली के एक हॉस्पिटल में हीरा सिंह राणा का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। जिसके बाद उनका पूरा परिवार शोक में डूब गया।

हीरा सिंह राणा के निधन की खबर मिलते ही हर कोई सदमे में डूब गया। आपको बता दे कि दो दिन पहले हीरा सिंह राणा के आंतों में इन्फ़ैकशन हुआ था। जिसके चलते उन्हे दिल्ली के ओएनजीसी हॉस्पिटल में एड्मिट करवाया गया था। इसके बाद डॉक्टर उनको बचाने का निरंतर प्रयास कर रहे थे। और उनकी हालत में भी सुधार आ रहा था। पर अचानक देर रात को उन्हे दिल का दौरा पड़ा जिसके कारण उनका देहांत हो गया।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जताया दुख-

हीरा सिंह राणा की मृत्यु पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने दुख जताया हैं और ट्विट्टर पर लिखा हैं कि “वह उत्तराखंड के एक रत्न ने। और उनके निधन के खबर ने एक बहुत बड़ा सदमा दिया हैं। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिवार को दुख सहन करने की शक्ति दे।

हीरा सिंह राणा एक बहुत बड़े गायक थे और उन्हे 2020 में भारत सरकार संगीत नाटक अकादमी मे उन्हे एक सलाहकार के रूप में नियुक्त किया था। साथ ही वह दिल्ली में स्थित गढ़वाली, कुमाऊँ और जौनसारी अकादमी के पहले उपाध्यक्ष भी बने थे।

हीरा सिंह राणा ने रंगीली बिंदी, रंगदार मुखड़ी, सौमनो की चौरा, ढाई विसी बरस हाई कमाला जैसे गानो से जनता का बहुत मनोरंजन किया था। साथ ही अपनी आवाज़ के दम पर उन्होने गायको की श्रेणी में एक अलग पहचान पाई थी।

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