Home त्यौहार भारत रत्न! डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती कब और क्यो मनाई जाती है?

भारत रत्न! डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती कब और क्यो मनाई जाती है?

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भारत रत्न! डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती कब और क्यो मनाई जाती है: अगर हम भारत की स्वतंत्रा की बात करे तो बहुत से महान व्यक्तियों का ध्यान आता है। जिन्होने देश के लिए अपनी जान को दाव पर लगा दिया और उन सभी महान व्यक्तित्वो ने अपने परिवार की चिंता करे बिना देश की आज़ादी में अपना अहम योगदान दिया। जिसको शायद ही हम कभी चुका सकते है। उनमे से एक महान व्यक्ति थे भारत रत्न और संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर। जिन्होने अपनी पूरी ज़िंदगी दलित व पिछड़े समाज के लोगो को उनका हक़ दिलाने के लिए दान कर दी और उनके कई प्रयासो से भारत में समानता का निर्माण हुआ।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती क्यो मनाई जाती है?

भारतवर्ष में 14 अप्रैल को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती मनाई जाती है। वो एक महान व्यक्ति व सविधान निर्माता थे। उनके संघर्ष व आन्दोलनों  द्वारा दलित समाज ने एक नयी पहचान पायी है। सामाजिक तोर पर जो उनके साथ छुआछूत व हीन भावना होती थी उसका अंत हुआ है। इसलिए 14 अप्रैल को हर साल इस दिन को उनकी जयंती के रूप में मनाया जाता है। और पूरा देश इसे एक त्योहार की तरह मनाता है। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की सबसे पहली जयंती 14 अप्रैल 1928 को सदाशिव रणपीसे ने पुणे में मनाई थी। भारत सरकार ने 14 अप्रैल 2015 से इस दिन राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा की थी और तबसे इस दिन अवकाश रखा जाता है।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जन्म-

डॉक्टर भीमराव रामजी अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 में मध्य प्रदेश के छोटे से कस्बे महू मे हुआ था जिसका नाम अब “डॉक्टर अंबेडकर नगर” है। उनके पिता का नाम सूबेदार रामजी शकपाल व माता का नाम भीमबाई था। भीमराव अंबेडकर अपने माता-पिता की चौदहवी संतान थे। उनका व्यक्तित्व बचपन से ही प्रतिभाशाली था और उनकी बुद्धिमिता, ईमानदारी, सच्चाई, का अनुभव उनके पिता को बचपन में ही हो गया था। भीमराव अंबेडकर को बचपन से ही पढ़ने का बहुत शौक था और एक दलित परिवार से होने के कारण उन्होने बचपन से ही समाज को बदलने व सबको समान हक़ दिलाने का संकल्प लिया था।

जब भीमराव अंबेडकर स्कूल में थे तो उनके साथ बहुत भेदभाव किया जाता था साथ ही उच्च समाज के व्यक्ति उनकी जाति के लोगो पर बहुत जुल्म किया करते थे। उन्हे स्वतंत्र तरीके से जीने की अनुमति नही थी। उनको अपनी जरूरत के सामान की चीज़ों के लिए भी संघर्ष करना पढ़ता था जिसको डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने हटाने की ठानी थी।

जब भीमराव अंबेडकर स्कूल में थे तो एक ब्राहमन शिक्षक उनकी ईमानदारी वी बुद्धिमता से बहुत प्रसन्न हुए थे। और भीमराव उनके प्रिए छात्रो में से एक बन गए थे। उन्होने ही भीमराव अंबेडकर को समाज में फैली असमानता को दूर करने का मार्ग प्रदशित किया था तथा समानता से पहले जातिवाद को रोकने की बात बताई थी।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की शिक्षा-

भीमराव अंबेडकर की पढ़ने व समाज में समानता की भावना ने उनके पिता रामजी को बहुत प्रभावित किया और उनके पिता ने भीमराव को पढ़ने की ठानी। भीमराव ने अपनी शुरू की पढ़ाई सतारा स्थित स्कूल से करी जहा उन्होने अँग्रेजी शिक्षा भी ग्रहण की। इसके परश्चात 1897 में उनका परिवार बंबई में बस गया। जहा उन्होने अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरी करके, बॉम्बे विश्वविद्यालय में सनातक की डिग्री प्राप्त की। 1913 में वह संयुक्त राष्ट्र अमेरिका गए जहा उन्होने स्नातकोत्तरकी डिग्री प्राप्त की। भीमराव अपने परिवार में सबसे जादा पड़े लिखे व्यक्ति थे और उनकी समाज को बदलने की सोच ने उनको बेरिस्टर भी बना दिया। समानताविहीन समाज निर्माण के लिए उन्होने बहुत सारी महान समाजशास्त्रियों की किताबों को ग्रहण किया और अंत में ब्रिटिश अधिकृत भारत में समान अधिकार के लिए आंदोलन की शुरुआत की।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने समाज कल्याण के लिए बहुत सारे आंदोलनो का वर्चस्व किया था जिनमे छुआछूत विरुद्ध संघर्ष और पूना एक्ट प्रमुख है। साथ ही वह सविधान निर्माण की कमेटी में भी समिलित थे और उन्होने छुआछूत मिटाने के लिए सविधान में एक कानून बनाया। अंबेडकर जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया और उनके इन प्रयासो द्वारा आज भारत मे हर नागरिक समान है और अपना जीवन पूरी स्वतंत्रा से व्यतीत कर सकता है।

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