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भगवान बुद्ध जयंती या बुद्ध पूर्णिमा क्यों मनाई जाती हैं? बुद्ध पूर्णिमा का क्या महत्व हैं?

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Budhpurnima Kya Hai, Budhpurnima Kyu Manayi /Banayi Jati Hai, Budh purnima Kese Manaye: भारत में अलग अलग धर्मो के लोग पूरी स्वतंत्रा के साथ अपना जीवन जीते हैं और अपने सभी त्योहारो को पूरी सहजता से मानते हैं। हर धर्म के लोगो की अपनी एक अलग मान्यता हैं जिसके अनुसार वो लोग अपना पूरा जीवन यापन करते हैं। भारत में मुख्यत चार प्रकार के धर्म पाये जाते हैं। हिन्दू धर्म, मुस्लिम धर्म, सिख धर्म, ईसाई धर्म पर इसके अलावा भी जैन धर्म और बोद्ध धर्म के लोग यहा निवास करते हैं। और अपने अपने धर्मो की मर्यादा में जीवन व्यतीत करते हैं। भारत एक विविधता वाला देश हैं और यहा हर प्रदेश, प्रांत व समुदाए के लोगो की अपनी एक अलग बोली होती हैं।

Budhpurnima Kya Hai-

तो आज हम यहा बात करेंगे बोद्ध धर्म की। जैसा कि आप सब लोग जानते हैं कि बोद्ध धर्म के सबसे बड़े प्रचारक गौतम बुद्ध ने अपना सारा जीवन दूसरों के लिए अर्पित कर दिया। सारे मोह-माया को त्याग कर उन्होने एक वनवासी के रूप में अपना पूरा जीवन व्यतीत किया और दूसरों के हितो कि रक्षा की। हम आज यहा गौतम बुध के जीवन के विषय के बारे में जानेगे? साथ ही बोद्ध जयंती या बुद्ध पूर्णिमा क्यों मनाई जाती हैं? इसका भी विस्तारपूर्वक वर्णन करेंगे?

भगवान गौतम बुद्ध का जीवन परिचय-

भगवान बुद्ध का जन्म लुंबिनी में 563 ईसा में हुआ था। उनके पिता का नाम शुद्धोधन तथा माता का नाम महामाया था। गौतम बुद्ध के पिता शाक्य कुल वंश के तथा माता कोलीय वंश की थी। गौतम बुद्ध की माता का निर्धन उनके जन्म के 7 दिन के प्रश्चात हो गया था। ऐसे में गौतम बुद्ध का पालन पोषण महारानी महामाया की छोटी सगी बहन महाप्रजापति गौतमी ने किया। गौतम का जन्म नाम सिद्धार्थ भी था।

गौतम बुद्ध को शुरू से ही राजपाठ में कोई दिलचस्पी नहीं थी। उन्हे समाज के दुखी व्यक्तियों के लिए अपना जीवन समर्पित करना था। गौतम बुद्ध ने गुरु विश्वामित्र के पास वेदो और शास्त्रों की जानकारी ली साथ ही वह युद्ध भूमि में तीर-कमान, रणनीति और एक सफल योद्धा के रूप में भी उभर के सामने आए।

गौतम के पिता शुद्धोधन ने उनका विवाह यशोधरा नमक कन्या के साथ करवाया। तथा उनके लिए एक महल का निर्माण करवाया जिसमे हर तरह की सुख-समृद्धि थी। और उनका महल में कई दास-दासी थे जो उनके एक आदेश में उनका कार्य कर देते थे। परंतु गौतम का मन इन सब से हट चुका था। विवाह के एक वर्ष के प्रश्चात जब गौतम के घर पुत्र हुआ तब उन्होने सारा राजपाठ त्याग दिया। और वन की और चले गए। जहा उन्होने बोध गया वृक्ष के नीचे अपनी तपस्या आरंभ की और घोर वर्षो की तपस्या के बाद उन्हे ज्ञान की प्राप्ति हुई और वो गौतम से भगवान गौतम बन गए।

भगवान गौतम बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया था। तथा इसके बाद उन्होने बोद्ध धर्म की स्थापना की। उन्होने अपने पूरे जीवन में बोध धर्म का बहुत प्रचार किया तथा लोगो को जीवन के सत्य के बारे में परिचित करवाया। 483 ईसवी में गौतम बुद्ध ने अपने शरीर को छोड़ दिया और उनकी आत्मा को मुक्ति मिली।

बुद्ध पूर्णिमा व बुद्ध जयंती क्यों मनाई जाती हैं?

भगवान महात्मा गौतम बुद्ध ने अपना पूरा जीवन गरीबो की मदद के लिए अर्पित कर दिया। उन्होने लोगो कों जीवन जीने के उपदेश तथा  जीवन के मंत्र से भी अवगत करवाया। पूरे विश्व में गौतम बुद्ध ने बोद्ध धर्म को एक अलग पहचान दिलाई और लोगो के हितो के लिए कार्ये किए। उन्होने कई देशो की यात्रा की और बोद्ध धर्म को पहचान दिलाने का कार्ये किया। तब से बोद्ध धर्म के व्यक्ति भगवान गौतम बुद्ध की स्तुति करने लगे और उन्होने गौतम बुद्ध के जन्म दिवस को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाना आरंभ कर दिया जिसमे वो लोग गौतम बुद्ध की स्तुति करते है।

गौतम बुद्ध ने जीवन की एक अलग व्याख्या की। साथ ही उन्होने बोद्ध धर्म के निर्माण की व्याख्या की और बोद्ध धर्म की 4 मुख्य सच्चाई से सबको अवगत करवाया।

  • संसार में दुख हैं।
  • दुख का प्रमुख कारण इच्छा हैं।
  • दुखों का समुदाए हैं।
  • दुखों से बचने का उपाए हैं।

ये वे चार बोद्ध धर्म कि सच्चाई हैं जिनके द्वारा हर व्यक्ति संसार में विजय प्राप्त कर सकता हैं। और जिसने बोद्ध धर्म को जान लिया उसने जीवन जीना जान लिया।

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